Editorial

Editorial:

वर्तमान अशोकनगर जिले का क्षेत्र महाभारत काल में शिशूपाल के चेदि राज्य का भाग था एवं जनपद, काल में चेदि जनपद था। छठवीं शताब्दी इई. पू में चंदेरी क्षेत्र (अशोक नगर का क्षेत्त) अवंती, दर्शा एवं चेदि। जनपदों में आता था, जो कि नंद, मौय, शुंग एवं मगध राज्यों का भाग रहा था।

यह माना जाता है कि सम्राट, अशोक उज्जैन को जीतकर जाते समय एक रात इस क्ेत्र में रुके थे, इस कारण इस क्षेत्र का नाम अशोकनगर पड़ा । मध्यु्गीन काल में चदेरी राज्य का भाग था ..

         8-9 वीं शताब्दी ई. में यह प्रतिहारों के अधीन हो गया। चंदेरी के कल्याण मंदिर अभिलेख से प्रतिहार बंश के । राजाओं की सूची प्राप्त होती है। इन प्रतिहार शासकों में प्रारंभिक शासक गोभद और दर्भहट के नामः कदवाहा के खण्डित प्रस्तर अभिलेख से विदित होते हैं। हरिराज का भारत कला भवन ताम्पत्र वि. स. 104). हरिराज का धुबोन अभिलेख (वि. स. ।०), रणपाल का चंदेरी अमिलेख (वि. सं.०0), रणपाल का परचई। अभिलेख (वि सं. ।), कीर्तिपाल का कदवाहा प्रस्तर अभिलेख, जैत्वर्मन चंदेरी अभिलेख आदि से प्रतिहार वंश के शासकों की जानकारी प्राप्त होती है।

          उपरोक्त अमिलेखों से परवर्ती प्रतिहारों की वंशावली निर्धारित की जा सकती है। जो निम्न प्रकार है- क्रमशः नीलकण्ठ, हरिराज, मीम, रणपाल, वत्सराज, स्वर्णपाल, कीर्तिपाल, अभयपाल, गोविन्द्रज, राजराज, वीरराज, जैत्रवर्मन तथा संभवतः उल्हण। नौलकण्ड़ संभवतः इस वंश का संस्थापक था। इसके अतिक्ता कदवाहा के इकला-पिछला मंदिर समूह के एक मंदिर की चन्द्रशिला पर स्पष्ट रूप से प्रतिहार लिखा हुआ है। लगभग 10 वीं शती ई. के अन्त से लेकर 13 वीं शती ई. के अन्त तक परवर्ती प्रतिहार राजवंश के अभिलेख, कदवाया, चंदेरी, थुबोन, महुआ, तेरही आदि केत्रों से प्राप्त हुए हं। कुछ अभिलेखों से ज्ञात होता है कि थे गुर्जर प्रतिहार की मूल शाखा के सामन्त थे। उनके पतनोपरान्त इन्होंने अपनी स्वतंत्रता पोपित कर दी होगी। कीर्तिपाल ने 10-11वीं शताबदी ई. में चंदेरी शहर की स्थापना की एवं उसकों अपनी राजधानी बनाया। प्रतिहार राजवंश के समाप्त होने के बाद जेजाकमुक्ति के घंदेलों ने भी यहाँ संपेक्ष में शासन किया। शंदेरी राज्य 11 वी शताब्दी ई. में महमूद गजनवी के बार-बार आक्रमणों से प्रभावित हुआ। दिल्ली सल्तनत की स्थापना के बाद, तुक, अफगान और मुगलों ने यहों शासन किया। चंदेरी बूंदेला शासक मोरप्रहलाद के शासन काल के दौरान। ग्वालियर के शासक दौलतराव सिंधिया ने चंदेरी पर हमला करने के लिये जनरल जॉन वैप्टिस्ट को भेजा था । उसने चंदेरी, ईसागढ़ और आसपास के इलाकों पर कब्जा कर लियाः। चंदेरी के अंतिम बुन्देला शासक राजा। भर्दन सिंह ने सन् । ई. में एक स्वतंब्ता सेनानी के रूप में सर्वोच्च बलिदान दिया।

-: डॉ शान्तिदेव सिसौदिया


12,883 total views, 55 views today

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*